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सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मौसम में बेहद आम हो जाती हैं ये 5 बीमारियां!
चिलचिलाती धूप, पसीना और उमस से राहत देने के लिठसरà¥à¤¦à¥€ का मौसम आ चà¥à¤•ा है। यह साल का वो समय है जब लोग सरà¥à¤¦ हवाओं और धà¥à¤‚द में कई कप अदरक की चाय और कॉफी पी जाते हैं। हालांकि, यह मौसम गरà¥à¤®à¥€ से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही लाता है कà¥à¤› बीमारियों और इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का ख़तरा, जो आपकी खà¥à¤¶à¥€ को चिड़चिड़ाहट में बदल देता है।
हेलà¥à¤¥ à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ की मानें, तो परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के ठंडा होने के साथ शरीर की गरà¥à¤®à¥€ में गिरावट का अनà¥à¤à¤µ होता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€, शरीर को इन नई जलवायॠपरिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ तालमेल बिठाने में समय लग सकता है, जो लोगों को सरà¥à¤¦à¥€ की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ बीमारियों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ संवेदनशील बना सकता है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सरà¥à¤¦à¥€ का मौसम शà¥à¤°à¥‚ होते ही बढ़ जाती हैं ये आम बीमारियां
1. आम ज़à¥à¤•ाम और बà¥à¤–़ार
सरà¥à¤¦à¥€ और खांसी सरà¥à¤¦à¥€ के मौसम की सबसे आम बीमारी है, जिसका लोग काफी आसानी से शिकार हो जाते हैं। à¤à¤•à¥à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, बदलते मौसम या किसी संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के संपरà¥à¤• में आने से कम पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर सीधा असर पड़ सकता है। कमज़ोरी, नाक बंद, छींकना, सिरदरà¥à¤¦, शरीर में दरà¥à¤¦, खांसी आदि सामानà¥à¤¯ सरà¥à¤¦à¥€ और फà¥à¤²à¥‚ के कà¥à¤› सबसे आमलकà¥à¤·à¤£ हैं।
2. टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤²à¥à¤¸
टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤² तब होते हैं, जब गले के पीछे दो अंडाकार आकार के टिशू पैडà¥à¤¸ में सूजन आ जाती है। इस सूजन की वजह से टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤² बढ़ जाते हैं, जिससे गले में जलन और दरà¥à¤¦ होता है। जिसकी वजह से आगे चलकर खाना खाने या पानी पीने में à¤à¥€ दरà¥à¤¦ होता है। चिकितà¥à¤¸à¤¾ विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, हवा में मौजूद वायरस और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤² के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के पीछे की वजह होते हैं।
3. कान का इंफेकà¥à¤¶à¤¨
सरà¥à¤¦à¥€ के मौसम में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• ठंड और नमी से à¤à¥€ कान के इफेकà¥à¤¶à¤¨ का जोखिम बढ़ता है। तीवà¥à¤° कान का संकà¥à¤°à¤®à¤£ सरà¥à¤¦à¥€ की à¤à¤• आम समसà¥à¤¯à¤¾ है, जो रातों-रात हो सकती है। इसलिठज़रूरी है कि इसकी जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ पहचान कर ली जाà¤à¥¤ कान का बंद होना और खà¥à¤œà¤²à¥€ के साथ-साथ दरà¥à¤¦ à¤à¥€ सरà¥à¤¦à¥€ से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾ का पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• लकà¥à¤·à¤£ है।
4. जोड़ों में दरà¥à¤¦
हालांकि, सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में जोड़ों के दरà¥à¤¦ के पीछे कोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• या चिकितà¥à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं है, लेकिन कई लोग हैं जो विशेष रूप से इससे पीड़ित रहते हैं। हालांकि, गठिया से पीड़ित लोगों के लिठà¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ नहीं कहा जा सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे गंà¤à¥€à¤° जोड़ों के दरà¥à¤¦ का अनà¥à¤à¤µ करते हैं। चिकितà¥à¤¸à¤¾ विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का दावा है कि सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मौसम में वायà¥à¤®à¤‚डलीय दबाव में गिरावट के साथ शरीर में 'पेन रिसेपà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸' अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। जिसकी वजह से टिशूज़ में सूजन आ जाती है और जोड़ों में दरà¥à¤¦ होने लगता है।
5. बà¥à¤°à¥‰à¤¨à¥à¤•ाइटिस
बà¥à¤°à¥‹à¤‚कियोलाइटिस छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और शिशà¥à¤“ं में à¤à¤• सामानà¥à¤¯ फेफड़ों का संकà¥à¤°à¤®à¤£ (वायरल) है। यह à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसकी वजह से फेफड़ों के सबसे छोटे वायॠमारà¥à¤— में बलगम बनने लगता है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह à¤à¤• संचारी रोग है, इसलिठलोगों को अपने पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• à¤à¤¹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤à¥€ उपाय करने का सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया जाता है।
ऊपर बताई गई बीमारियों के अलावा, सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मौसम में पेट का फà¥à¤²à¥‚, साइनासिटिस, तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर खà¥à¤œà¤²à¥€ करने वाली जà¥à¤à¤‚ आदि जैसे रोग à¤à¥€ आम हैं। अचà¥à¤›à¥€ बात यह है कि इन सà¤à¥€ बीमारियों का इलाज आसानी से उपलबà¥à¤§ है, लेकिन इनके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को टाले नहीं और फौरन डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह करें।
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